Thursday, October 29, 2009

पूछ लेना


जब किसी से किसी का महबूब जुदा हो जाता है
तो उस की रातें काफूर बन जाती है
ये चाँद भी गवाह है तारों से पुंछ लेना ,
कटती है कएसे रातें यारों से पुंछ लेना !
दरिया का वह किनारा चड़ती हुई जवानी ,
लहरो की वह रवानी धाराऔ से पुंछ लेना !
शबनम की नन्ही बूंदे , कलियो की पतियो पर ,
पलकों से असक जरी बहारों से पुंछ लेना !
इक इंतजार तेरी , दिल बेकरार मेरा ,
ये चाँद भी गवाह है तारो से पुंछ लेना !
पलक झापक रहा हू पहलू बदल-बदल कर ,
क्या हाल है "अंजान' का तारो से पुंछ लेना !

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