Wednesday, November 4, 2009

मुहब्बत


करके टुकरे जिगर के अश्कों की बोसार करते हैं ,
इस तरह देखिय हम आप से प्यार करते है !
राहे वफ़ा में मिलती है फकत बवफ़ाई रुसवाई ,
मुहब्बत पर मिट जाने का लोग वायदा सौ बार करते हैं !
बेवफा हो सनम तो माना किस्मत की बात हैं ,
बे-वफ़ा से भी देखिय लोग टूट कर प्यार करते हैं !
आने का उन का भरम ही रहे तो इतना है काफ़ी ,
कब्र में रह कर भी देखिय लोग इंतजार करते हैं !
ये क़हसी बला हैं भला मुहब्बत भी "अंजान" ,
क्यों इस तरह बेवज़ह लोग मिटने को तय्यार रहते हैं !

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