शाम ढलते ही उदास हो जाते है हम ,
रात होते ही तारे गिनते है हम ,
तुम्हे याद करते-करते करवटें बदलते ,
ना जाने कब सो जाते है हम !
सहर होती है इक पीडा लिए ,
रातो का दर्द उनीदी आखों मे लिए ,
कितना ही अछा होता सनम ,
गर तुम से मुहब्बत ना करते !!
ये दर्द का समंदर हमें ना मिलता ,
आज अपनो मे कोई पराया ना होता ,
कुछ मंजिले पा लेते "अंजान"भी ,
गर दिल तुम से टकराया ना होता !!
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