Sunday, October 4, 2009

ये दुनिया का दस्तूर हे

कब मिलन होता हे यहा ,
बिसोह ही होता हे यहा ,
गर तन मन भी जलाए ,
अंधकार ही होता हे यहा !
सांज फिर दुडे सवेरा ,
सामगम नही होता यहा ,
हर ज्वा सपने तरफ़्ते हे
कोन हमदर्द होता यहा ,
ये दुनिया का दस्तूर हे " अंजान "
कोन आबाद होता हे यहा !

1 comment:

  1. aap ki rachna "duniya ki dastur " pasand ayi. sach aap kafi aacha likte h .
    again subh kamnay........
    Nitika LION
    PR.LION CULB

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